अशोक राजोरिया गुरुजी का जन्म जयपुर, राजस्थान में हुआ। इन्होंने राजस्थान विश्वविद्यालय से शिक्षा ग्रहण की है। बचपन से ही इनको सकारात्मक, प्रेरणादायक पुस्तके एंव महापुरुषो की जीवनियां तथा आत्म-कथायें पढ़ने का गहरा शौक रहा है। सैकड़ो महापुरुषो की प्रेरणादायक जीवनियां पढ़ने के बाद इनके मन पर सबसे गहरा प्रभाव डाला – महात्मा गांधी एवं अब्राहम लिंकन ने ।
जिस प्रकार गांधी जी ने देश को आजाद करा के एवं लिंकन ने अमेरिका से रंग भेद समाप्त करके करोड़ो लोगों के जीवन में सकारात्मक क्रान्तिकारी परिवर्तन किया था, ठीक उसी प्रकार गुरू जी के मन में भी लाखों – करोड़ो लोगो के जीवन मे सकारात्मक क्रान्तिकारी परिवर्तन करने के सपने ने जन्म लिया।
इस सपने को पूरा करने के लिये गुरुजी राजनीति में आ गये । 1996 से 2006 तक गुरूजी राजस्थान में प्रमुख राजनैतिक पार्टी के विभिन्न पदों पर रहकर लोकप्रिय वक्ता एवं प्रभावशाली राजनेता के रुप में अपनी सेवायें देते रहे।
10 साल तक राजनीति में रहकर इनको महसूस हुआ कि सच्चाई, ईमानदारी एंव आत्म-सम्मान के साथ राजनीति के माध्यम से अपने सपने को पूरा करना बहुत कठिन है । इसलिये इनका राजनीति से मोहभंग हो गया और व्यवसाय करने लगे ।
लेकिन ऐसे साधारण जीवन से गुरुजी संतुष्ट नहीं थे । इनकी अन्तरात्मा में रह-रहकर ये विचार उमड़ते -घुमड़ते थे कि मैं कौन हूं ? मेरे जीवन का लक्ष्य क्या है ? परमात्मा ने मुझे इस धरती पर क्यों भेजा है ? मैं अपने सपने को साकार करने के लिये कौन सा क्षेत्र या माध्यम अपनाऊं ?
फिर अपने आप इनके मन में योग-ध्यान-साधना, आध्यात्मिकता तथा ‘‘अवचेतन मन के चमत्कारों’’ के लिये गहरा आकर्षण पैदा हो गया और इनका सघन व विस्तृत ज्ञान लेने के लिये गुरुजी देश के कोने – कोने में कई वर्षो तक विभिन्न योग आश्रमों एंव ध्यान केन्द्रों का भ्रमण करते रहे तथा देश में प्रचलित भिन्न – भिन्न प्रकार की योग, ध्यान व साधना पद्धतियों एवं अवचेतन मन का गहन अध्ययन और Research करते रहे।
अपनी अन्तरात्मा की अनन्त गहराईयों की यात्रा करने के लिये इन्होंने अनेक बार घर- परिवार तथा बाहर की सांसारिक दुनियां को भूलकर हिमालय की गोद में – नेपाल, हिमाचल व उत्तराखंड में मौन तथा एकांत में रहकर अनेको बार गहन योग-ध्यान-साधना की ।
जून 2014 में हिमाचल के धर्मशाला स्थित मैकलोडगंज में – जहां दलाई लामा भी रहते हैं, गुरुजी प्रकृति की गोद मे, दीर्घ अवधि के लिये अकेले गहरे मौन व ध्यान-साधना मे गये । तब उनको वहां के प्राकतिक सौन्दर्य एवं आध्यात्मिक वातावरण मे दिव्य चेतना एवं असीम आत्मिक शांति का गहन अनुभव हुआ ।
प्राचीन भारत के महान ऋषि -मुनियो द्वारा अविष्कार की गयी चमत्कारी सनातन तकनीक ‘‘प्राण-योग-साधना ’’ का अभ्यास गुरूजी पिछले 17 वर्षो से कर रहे है । इसी साधना से सन 2002 मे गुरूजी के Heart के Blockage खुल गये थे ।
इसी साधना के दौरान गुरूजी ने संकल्प लिया की जिस साधना से उनको अकल्पनीय स्वाथ्य-लाभ एवं परम-आनंद की अनुभूति हुई है, उस दुर्लभ ज्ञान एवं दिव्य अनुभूति को देश-विदेश मे करोड़ों लोंगो तक पहुँचाना है ।
अब गुरूजी के जीवन का एक ही लक्ष्य है – इस चमत्कारी ‘‘प्राण-योग-साधना ’’ एवं ‘‘अवचेतन मन के चमत्कारों’’ से संसार भर के लाखो- करोड़ों लोगो को तन एवं मन से स्वस्थ रहकर 100 साल तक जीने के रहस्य सिखाना ।
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