“प्राण-योग साधना” प्राचीन भारत के महान ऋषि मुनियों के द्वारा खोजी गई ऐसी चमत्कारी पद्धति है, जिसका रोजाना मात्र एक घंटा अभ्यास करने से हमारे शरीर के कण-कण में तरंगें पैदा होती हैं। ये तरंगें (Vibrations) हमारे शरीर के प्रत्येक अणु-परमाणु एवं कोशिका में जो भी गन्दगी, कीटाणु-विषाणु एवं Free Radicals हैं, उनको नष्ट करके शरीर से बाहर निकाल देती है एवं शरीर के कण-कण में भरपूर प्राण वायु , ऊर्जा तथा ऑक्सीजन भर देती है जिससे हमारे शरीर का प्रत्येक अंग-प्रत्यंग एवं कोशिकायें बिल्कुल स्वस्थ तथा पुनर्जीवित हो जाती है।इस क्रिया से स्वतः अपने आप ही हमारी समस्त शारीरिक, मानसिक एवं पैत्रक बीमारियां जड़-मूल से नष्ट होकर दूर हो जाती हैं जिससे मानव चिर-युवा (Forever Young) हो जाता है। “प्राण-योग साधना” साक्षात् ब्रह्म विद्या है। यह जीव आत्मा के परमात्मा से मिलने का लघु मार्ग है।